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महाबलीपुरम का इतिहास | mahabalipuram mandir

  • महाबलीपुरम चेन्नई से 60 किमी दूर तमिलनाडु राज्य में स्थित है। तमिलनाडु शहर अपने शानदार मंदिर वास्तुकला और समुद्री तट के लिए जाना जाता है।
  • दक्षिण भारत के पल्लव राजवी नृसिंहवर्मन प्रथम के उपनाम ” महामल्ल “ के नाम पर से यह नगर का नाम महाबलीपुरम रखा गया।
  • वर्तमान में महाबलीपुरम तमिलनाडु के चेनगालपेट  जिले में स्थित है।
  • प्राचीन काल में, शहर एक प्रमुख बंदरगाह था, जहां से भारतीय सामान समुद्र द्वारा निर्यात किया जाता था।
  • यहाँ पाँच मंदिरों में एक विशाल शैली में नक्काशी की गई है, जिसे पंचरथ के नाम से जाना जाता है। इन पंचरथों को पांडवों का रथ भी कहा जाता है।  इस रथ आकार के मंदिरों का नाम पांडवों के नाम पर रखा गया है।
  • जैसे .. धर्मराज रथ, भीम रथ, द्रौपदी रथ और नकुल- सहदेव रथ चार मंजिला धर्मराज रथ इन सभी रथों में सर्वश्रेष्ठ है।
  • शहर इस शहर को सात पैंगोडाओं का शहर भी कहा जाता है क्योंकि .. पल्लव वंश के राजा नरसिंहवर्मन प्रथम के समय में, यहां कुल सात रथ मंदिर बनाए गए थे। हालांकि, आज केवल पांच मंदिर ही बचे हैं। दो मंदिर समुद्र में गायब हो गए हैं।
  • यहा हास्यमुँदरा में विष्णु की मूर्ति और महिषासुर को मारती हुई देवी दुर्गा की मूर्ति देखने लायक है।
  • दुनिया की सबसे बड़ी पाषाण की मूर्ति भागीरथी का तप  भी यहाँ स्थित है।
  • महाबलीपुरम के इन स्मारकों को 1984 में विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है।

खजुराहो के मंदिर

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